नवरात्रि स्पेशल, माँ का एक मंदिर ऐसा भी
रॉकी दूबे, ओबरा
ओबरा प्रखंड के खरांटी स्थित अष्टभुजी मंदिर का इतिहास सैकड़ो वर्ष पुराना रहा है। मान्यता के अनुसार इस रास्ते से गुजरते वक्त माता रानी ने यहां रात्रि विश्राम किया था। जानकारी देते हुए स्थानीय निवासी सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक मदन मोहन पांडेय, सेवानिवृत्त शिक्षक रामलखन पांडेय, प्रकाश रंजन एवं कौशल कुमार ने बताया कि मान्यता है कि आज से लगभग 500 वर्ष पूर्व खरांटी निवासी बजरंग सहाय को रात में माता रानी ने सपना दिया कि मैं आप सबों की कुलदेवी हूं और मैं कोलकाता कालीघाट गंगा जी में हूँ। मुझे यहां से ले चलो उसके बाद उन्होंने कोलकाता पहुंच स्नान के लिए डुबकी मारा तो काली मां उनके हाथ में आ गई और वहां से बैलगाड़ी के माध्यम से वापस खरांटी आये। उसके बाद ग्रामीणों के सहयोग से एक मंदिर का निर्माण कराया गया जिसमें एक ब्राह्मण परिवार की कुंवारी कन्या ने खुद से समाधि लिया। जानकारी देते हुए स्थानीय लोगों ने बताया कि यहाँ जमींदारी प्रथा के समय से जमींदारो की ओर से प्रतिदिन भव्य आरती एवं नगाड़ा बजाया जाता था। यहाँ सप्तमी तिथि की मध्य रात्रि को माँ निशा बलि के नाम से बकरा का बली चढता है एवं नवमी को भक्त बली देते है। आजादी से पहले भैंसा का बली पडता था जिसपर अंग्रजी पुलिस ने रोक लगा दिया था और बली देने वाला राधा यादव का मृत्यु हो गया। पूजा समिति के सदस्य सहजानंद कुमार डिक्कू, मुन्ना दुबे, रिषिकेष दुबे, चूसन पांडेय, विनकटेश पांडेय, अभिषेक पांडेय, लवकुश पांडेय, रिषी पांडेय, अखिलेश पांडेय, सुशील कुमार ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी माता रानी की पूजा धूमधाम से की जा रही है।
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