चितरंजन कुमार औरंगाबाद।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के द्वारा सदन में बोले गए महिलाओं पर ओछी टिप्पणी पर लोजपा नेता प्रमोद कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री को विवेकहीन बताया है।लोक जनशक्ति पार्टी(रामविलास) के प्रदेश महासचिव व रफीगंज विधानसभा क्षेत्र के प्रत्याशी रह चुके जिले के प्रखर समाजसेवी प्रमोद सिंह ने एक प्रेस बयान जारी कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को विवेकहीन, अमर्यादित एवं अपसंस्कृति का द्योतक बताया है।साथ ही साथ उन्होंने उन्हे दलित विरोधी करार दिया है।
श्री सिंह ने \’ संगति से गुण होत है,संगति से गुण जात \’ वाली एक प्रचलित कहावत का उदाहरण देते हुए कहा है कि उन्होंने ने जबसे एनडीए छोड़ा है तबसे उनका आचरण, व्यवहार एवं बोलने की शैली में उच्चश्रृंखलता आ गई है तथा वे अपने पद की गरिमा और मर्यादा को भूल गए हैं।यही कारण है कि दोनो सदनों में जिस तरीके से उन्होंने लाज, हया और शर्म को तिलांजलि देते हुए महिलाओं को अपमानित कर देश में बिहार को शर्मशार करने का काम किया है।उसे कोई भी सभ्य समाज स्वीकार नहीं कर सकता और जिसने स्वीकार किया और जो उनके समर्थन में खड़े हैं उनके बारे में समझा जा सकता है कि वे किस समाज से जुड़े हुए हैं।
श्री सिंह ने बताया कि बचपन से हमें अपनी सभ्यता और संस्कृति से जुड़कर रहने, बड़ों एवं महिलाओं के लिए हमेशा सम्मान देने की बाते सिखाई जाती है।मगर मुख्यमंत्री ने अमर्यादित टिप्पणी कर अपनी मां की कोख को भी कलंकित कर दिया।भले ही मुख्यमंत्री ने अपने उक्त बच्चन के लिए क्षमा मांग ली हो मगर इस जीवन तो क्या अगले जीवन में भी उससे मुक्ति नहीं मिल सकती।उन्होंने कहा कि जिस देश में महिलाओं को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है,जिस देश में कन्या की पूजा की जाती है।इस देश के एक राज्य का मुख्यमंत्री अपने जुबान से पतित बात करे तो यह सोचा जा सकता है कि उसका दृष्टिकोण क्या है।
श्री सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री की विवेकहीनता यही समाप्त नहीं हुई बल्कि गुरुवार को भी वे शब्दों की मर्यादा भूलकर दलितों के मसीहा पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को सदन में अपमानित करने का काम किया है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि उनके ऊपर संगति का असर पड़ चुका है और वे अपनी मानसिकन संतुलन खो चुके है।श्री सिंह ने बिहार के राज्यपाल से भी अपील की है कि इस मामले को संज्ञान में लेकर केंद्र को अपनी रिपोर्ट भेजें।क्योंकि अब ऐसे व्यक्ति के हाथ में बिहार की सत्ता नही दी जा सकती।क्योंकि इनकी कार्यशैली से विश्व में बिहार की छवि धूमिल हो रही है।
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