घुंसखोर थानाध्यक्ष आनन्द कुमार गुप्ता को निगरानी की टीम ने घूंस लेने के आरोप में किया गिरफ्तार

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गोह औरंगाबाद बिहार:-

एक पुरानी कहावत है जिसे बुजुर्गों के द्वारा हमेशा कहा जाता है कि जब नाश मनुष्य पर आता है पहले विवेक(बुद्धि)मर जाता है।कानून को सही से अनुपालन करवाने के लिए बर्दी के साथ दो स्टार आत्मरक्षा के लिए बॉडीगॉर्ड एक पिस्टल और रिवायलवर सरकार एक थानाध्यक्ष को मुहैया कराती है।साथ ही साथ काम के बदले अच्छा खशा पेमेंट भी सरकार उपलब्ध कराती है।फिर भी घुंसखोरी के नाम से बर्दी का दागदार बना देते हैं।जिसका नतीजा होता है कि किये गये करतूत दुनिया मे जग जाहिर होता है।उसके बदले कभी निलंबित तो कभी कभार नौकरी से भी हाथं धोना पड़ता है।एक दरोगा को बनाने के लिए माता पिता धरती के हर वो कर्म करते हैं।जब बेटा दरोगा बनता है तो उस माता पिता की छाती गर्व से चौड़ी हो जाती है।ज्वाइनिंग के समय कसमे खाते हैं कि भ्रष्टाचार से कोई समझौता नही करेंगे घूसखोरी से दूर रहेंगे।लेकिन जब बर्दी चढ़ती है तो सब वादे कसमे को ताख पर रख दिया जाता है।

ऐसा ही कुछ औरंगाबाद जिले में गुरवार को हुआ।जिले में एक खबर तेजी से फैली की औरंगाबाद जिले में एक थानाध्यक्ष निगरानी के हथे चढ़ गया और निगरानी की टीम ने उसे गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई।जब इस बात की तहकीकात शुरू हुआ तो पता चला कि पूर्व में कैमरा चोरी मामले में निलंबित थानाध्यक्ष जिन्हें निलंबन अवधि समाप्त होने के बाद पुनः थानाध्यक्ष बनाया गया था।उसे ही 20 हजार रुपया घूंस लेते गिरफ्तार कर लिया गया।निगरानी की इस करवाई से पूरा औरंगाबाद जिले के प्रशासनिक महकमा सकते में है।प्राप्त जानकारी अनुसार एक अपहरण मामले में नाम को काटने के लिए थानाध्यक्ष खुद घूंस की राशि अपने हाथों ले रहे थे।उसी जुर्म में उसे गिरफ्तार किया गया।हालांकि जिस थानाध्यक्ष की गिरफ्तारी निगरानी ने किया है।वे जब थानेदार बने हैं तब तब वे विवादों में रहकर अपनी नाक कटवा ली है।औरंगाबाद जिले दाउदनगर अनुमंडल क्षेत्र के गोह प्रखंड उपहरा थानाध्यक्ष आनन्द कुमार गुप्ता ही वे थानाध्यक्ष हैं जिन्हें निगरानी की टीम गिरफ्तार कर ले गई है।गिरफ्तारी की तस्वीर में थानाध्यक्ष कला टी-शर्ट पहने हुए है और अगल बगल निगरानी टीम के सदस्य बैठे हुए हैं।

अब जाएंगे जेल,आरोप सिद्ध हुई तो जाएगी नौकरी

जानकारों के मुताबिक बताया जा रहा है जो निगरानी के हाथों चढ़ता है उसे जेल भेज दी जाती है।हालांकि 3 महीना या 6 महीना में बेल मिल जाता है।उसके बाद मामला कोर्ट में होती है।चार्जशीट के बाद अगर आरोप सिद्ध हो जाती है तब उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाता है।

जिले के गोह प्रखंड में दूसरी घटना है जब कोई थानाध्यक्ष निगरानी के हाथों गिरफ्तार हुआ है।पूर्व में गोह थाना के थानाध्यक्ष रहे मनोज कुमार को भी निगरानी ने रंगे हाथों गिरफ्तार कर ली थी।पुनः उसी प्रखंड में गुरुवार की सुबह उपहरा थानाध्यक्ष को निगरानी ने गिरफ्तार कर ले गई है।हालांकि की सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार निगरानी की टीम ने थानाध्यक्ष आनन्द कुमार गुप्ता को अरवल में ले जाकर पूछताछ कर रही है।इधर जिले में यह खबर आग की तरह फैल गई है।लोग तरह तरह के कमेंट भी कर रहे हैं और कह रहे हैं कि जब नाश मनुष्य पर आता है पहले विवेक मर जाता है।यही हाल थानाध्यक्ष आनन्द कुमार गुप्ता के साथ हुआ है।

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